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मनोज मुंतशिर ने ‘रामायण’ काल की तुलना बाबर के दौर से की…लोग बोले- हमारे प्रभु का अपमान न करें

रणबीर कपूर की ‘रामायण’ कल यानी 5 नवंबर को बड़े पर्दे पर आ रही है. इस फिल्म का जबरदस्त क्रेज़ देखा जा रहा है और बंपर एडवांस बुकिंग भी हो रही है. इस बीच आदिपुरुष के संवाद लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला ने एक वीडियो संदेश जारी किया है. अपने इस वीडियो संदेश में उन्होंने भारत में दो परंपराओं के होने का दावा किया है. वो कहा कि अपने बच्चों को बताइए कि हमारे देश में दो तरह की परंपराएं हैं, बाबरी परंपरा और भारतीय परंपरा. पर जैसे ही उन्होंने अपना ये संदेश भरा वीडियो एक्स पर पोस्ट किया, लोगों ने उन्हें आदिपुरुष की खट्टी यादों को लेकर ट्रोल करना शुरू कर दिया.

मनोज मुंतशिर ने वीडियो में कहा, “रामायण की रीटेलिंग यानी उसे बार-बार दोहराना. हर अगली पीढ़ी को सुनाना. ये क्यों जरूरी है? क्योंकि हमारे बच्चे सिर्फ हमारे कहने से राम भक्त नहीं हो जाएंगे. उन्हें तर्क, कारण, तर्कसंगत चाहिए. आप उन्हें विकल्प दीजिए. बताइए कि इस देश में दो तरह की परंपराएं हैं. बाबरी परंपरा और भारतीय परंपरा. पहले दोनों का फर्क समझ लो, फिर मेरे बच्चों, जो तुम्हें ठीक लगे चुन लो. हम आपके स्वतंत्र निर्णय का सम्मान करते हैं. अब भारतीय परंपरा क्या है? राजा दशरथ के चार बेटे हुआ करते थे. राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न. एक भाई को श्री राम को वनवास मिला. दूसरा लक्ष्मण पीछे-पीछे हो लिया. तीसरा शत्रुघ्न निर्जल उपवास पर बैठ गया कि जब तक भैया नहीं आएंगे अन्न का एक दाना ग्रहण नहीं करूंगा. और चौथा भरत वो अपने बड़े भैया को मनाने दल बल के साथ वन जा पहुंचा. बोला भैया वापस चलिए अयोध्या का राजपाठ संभालिए. जब राम नहीं लौटे तो भरत ने उनकी खड़ाऊ थाली में सजाई और थाली शीश पर लिए अयोध्या आ गए. शीश पर खड़ाऊ आंखों में पानी राम भक्त ले चला राम की निशानी. ये थी भारतीय परंपरा.”

मनोज के मुताबिक बाबरी परंपरा

‘रामायण’ काल की तुलना उन्होंने बाबर के दौर से करते हुए कहा, “और अब बाबरी परंपराय. शाहजहां को भी चार बेटे थे. दारा, शुजा, मुराद और औरंगजेब. एक बेटे ने, औरंगजेब ने तख्त के लिए तीनों भाइयों का कत्ल करवा दिया और बाप को कैद खाने में डाल दिया. इस पर भी दिल नहीं भरा तो दारा का सर काट के थाली में सजाया और शाहजहां के सामने कैदखाने में पेश कर दिया. दो थालियां हैं आपके सामने बच्चों. एक थाली में राम की खड़ाऊ रखी है और दूसरी में एक कटा हुआ सर. आप कौन सी थाली अपने घर ले जाना चाहेंगे आप डिसाइड कीजिए. एक और बात, राम और रामायण को हिंदू मुसलमान में बांट के देखना ठीक नहीं है. जब महर्षि वाल्मीकि ने रामायण लिखी थी तो ना मोहम्मद साहब हुए थे, ना जीसस. रामायण सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं पूरी ह्यूमैनिटी के लिए लिखी गई थी. चुनिए जो आपको सूट करे. देखने के लिए धन्यवाद.”

वीडियो पर लोगों ने किया ट्रोल

वीडियो जैसे ही ट्वीट किया गया, लोगों ने मनोज मुंतशिर पर निशाना साधना शुरू कर दिया. कुछ लोंगों ने इस बात को लेकर आलोचन की कि रामायण के युग की तुलना किसी इंसान से कैसे की जा सकती है. वहीं कुछ लोगों ने आदिपुरुष में लिखे उनके संवाद को याद दिलाना शुरू कर दिया. एक यूजर ने कहा, “त्रेता युग को कंपेयर कर रहे हो कलयुग से. वाह क्या ज्ञान है तुम्हारा.” एक अन्यू यूजर ने कमेंट किया, “1947 से हिंदुस्तान में बाबरी परंपरा कभी थी ही नहीं. पता नहीं क्यों आप जैसे लोगों को 2014 के बाद बाबरी परंपरा याद आने लगी और दिखने लगी. रामायण या श्रीराम की इन सबसे तुलना कर के हमारे प्रभु का अपमान न करे.”

Manoj Comment

पोस्ट पर आए ये कमेंट

एक यूजर ने मनोज मुंतशिर का मजाक उड़ाते हुए कहा, “हम तो आपके आदिपुरुष के प्रकोप से ही नहीं उबर पाए हैं प्रभु.” एक ने लिखा, “आदिपुरुष के वक्त इतना नहीं बोला था, जितना रामायण के टाइम बोल रहा है. जल के राख हुई पड़ी है बेचारे की.” एक ने रामायण के डायलॉग शेयर करते हुए लिखा, “बताओ, अब मनोज मुंतशिर ज्ञान देगा रामायण और उसकी परंपरा पर.”

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