शिक्षा

NEET PG में अब परसेंटाइल नहीं कैंडिडेट्स की रैंक जारी होगी, इसकी आधार पर मिलेगा एडमिशन

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) PG से होने वाले एडमिशन फॉर्मेट में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. मेडिकल कमीशन (NMC) अब काउंसलिंग में एडमिशन के लिए NEET PG की परसेंटाइल की जगह कैंडिडेट्स की रैंक जारी करेगा. NEET PG के साथ ही NEET SS से एडमिशन देने के लिए अब परसेंटाइल-आधारित सिस्टम को हटाकर रैंक-आधारित सिस्टम लागू किया जाना है. NMC इस बदलाव को सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है. सुप्रीम कोर्ट में ये जानकारी NEET-PG एडममिशन और काउंसलिंग प्रक्रिया की समीक्षा के लिए बनाई गई 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में दी है.

आइए, विस्तार से पूरा मामला जानते हैं. जानते हैं कि क्यों एडमिशन के लिए परसेंटाइल की जगह मेरिट रैंक जारी करने की आवश्यकता पड़ी है. जानेंगे कि क्या नए सिस्टम में कैंडिडेट्स को उनकी रैंक के साथ परसेंटाइल बताए जाएंगे या नहीं.

कैंडिडेट्स की सिर्फ रैंक जारी होगी

बदलाव के तहत NMC जल्द ही NEET PG और NEET SS में शामिल होने वाले कैंडिडेट्स का रिजल्ट जारी करते समय उनकी रैंक जारी करेगा. नई व्यवस्था में कैंडिडेट्स की परसेंटाइल जारी नहीं की जाएगी. मौजूदा व्यवस्था में NEET PG और NEET SS में कैंडिडेट्स की परसेंटाइल जारी की जाती है.

अभी रैंक जारी करने के नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा

NEET-PG एडममिशन और काउंसलिंग प्रक्रिया की समीक्षा के लिए बनाई गई 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अभी रैंक जारी करने के नियम को अंतिम रूप दिया जाना है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 23 सितंबर को हुई NMC की बैठक में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है. इसके लिएNMC सचिव की तरफ से 1 अक्टूबर 2026 को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) को लिखे पत्र का हवाला दिया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि NMC नए नियम लाने की प्रक्रिया में है. इसमें NEET PG और NEET SS काउंसलिंग के लिए केवल रैंक-आधारित सिस्टम अपनाया जाएगा. नतीजों में परसेंटाइल मार्क्स नहीं बताए जाएंगे. केवल कैंडिडेट्स की रैंक जारी की जाएगी.

माइनस 40 परसेंटाइल में एडमिशन के नियम के बाद बदलाव

बीते साल यानी NEET PG 2025 की क्वालिफाइंग कटऑफ में केंद्र सरकार ने गिरावट की थी. क्वालिफाइंग कटऑफ में ये गिरावट एडमिशन के लिए की गई थी. संशोधित मानदंडों के तहत जनरल कैटेगरी के लिए क्वालिफाइंग स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया था, जबकि SC/ST/OBC श्रेणियों के लिए इसे 235 से घटाकर माइनस 40 कर दिया गया. इसे फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर इन दिनों सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही है. इसी कड़ी में 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंपी है.

क्वालिफाइंग कटऑफ को कम करने के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि NEET परीक्षाओं की गरिमा बनी रहनी चाहिए. रिपोर्ट में कहा गया है कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में क्वालिफाइंग कटऑफ को इतना कम नहीं किया जाना चाहिए कि बहुत खराब या नकारात्मक प्रदर्शन करने वाले कैंडिडेट्स भी प्रवेश के योग्य हो जाएं. प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्व को केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए.

Related Articles

Back to top button