CBSE 12वीं बोर्ड अकाउंटेंसी-मैथ्स एग्जाम्स में कैलकुलेटर प्रयोग की मंजूरी देने की मांग, दिल्ली HC ने मांगा जवाब

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं बोर्ड एग्जाम में अकाउंटेंसी और मैथ्स सब्जेक्ट के एग्जाम्स में कैलकुलेटर के प्रयोग की मंजूरी दिए जाने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है. इस संबंध में दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. इस याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने इस संबंध में नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार, CBSE, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT), और PARAKH (नेशनल असेसमेंट सेंटर) से जवाब मांगा है.
आइए, विस्तार से पूरा मामला जानते हैं. जानते हैं कि 12वीं बोर्ड एग्जाम में किस तरह के कैलकुलेटर के इस्तेमाल करने की मंजूरी मांगी गई है. जानेंगे कि इस संबंध में सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा है.
बेसिक कैलकुलेटर की मंजूरी
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में CBSE 12वीं बोर्ड एग्जाम में बैठने वाले स्टूडेंट्स को अकाउंटेंसी और मैथ्स सब्जेक्ट के एग्जाम में बेसिक, नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की परमिशन मांगी गई है, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए जवाब तलब किया है. सुनवाई के दौरान CBSE की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि इस मामले पर विचार किया जा रहा है और उन्होंने निर्देश लेने के लिए समय मांगा. याचिका में डिस्कैलकुलिया वाले स्टूडेंट्स के लिए मौजूद मौजूदा कैलकुलेटर सुविधा को दूसरी कैटेगरी के दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए भी बढ़ाने की मांग की गई है.
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका में कहा गया है कि CBSE का कैलकुलेटर पर लगातार रोक लगाना मनमाना है और भारत के संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन है, खासकर तब जब उसकी अपनी करिकुलम कमेटी ने नवंबर 2024 में 12वीं अकाउंटेंसी की परीक्षाओं में बेसिक कैलकुलेटर की इजाज़त देने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी. याचिकाकर्ता के मुताबिक, यह प्रस्ताव दिसंबर 2024 में CBSE की गवर्निंग बॉडी के सामने रखा गया था, लेकिन इसे न तो नोटिफ़ाई किया गया और न ही लागू किया गया.
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि लंबे कैलकुलेशन में परीक्षा का काफी समय लग जाता है, जिससे स्टूडेंट्स को अकाउंटेंसी और मैथ जैसे विषयों की अपनी कॉन्सेप्चुअल समझ दिखाने के लिए कम समय मिलता है.
याचिका में CBSE को मैथ में कैलकुलेटर की अनुमति देने और डिस्कैलकुलिया से पीड़ित स्टूडेंट्स के अलावा अन्य दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए मौजूदा कैलकुलेटर सुविधा बढ़ाने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश देने की भी मांग की है. याचिका में कहा गया है कि 17 अगस्त की तारीख वाली एक रिप्रेजेंटेशन, जिसमें प्रस्ताव को लागू करने और एक उचित जवाब की मांग की गई थी, का अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.




