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Ramayan Old Vs New: रामानंद सागर के ‘कॉस्ट्यूम’ वाले जटायु से नितेश तिवारी के ‘VFX’ पक्षीराज तक, कितना बदला किरदार?

Ramayan Old Vs New: रामायण की महागाथा में जटायु केवल एक पात्र नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ने और धर्म-रक्षा में सर्वस्व न्योछावर करने की अमर मिसाल हैं. 1987 में रामानंद सागर की ऐतिहासिक दूरदर्शन ‘रामायण’ में जटायु का रावण संग युद्ध देखकर जहां दर्शक भावुक हो उठे थे, वहीं 2026 में 2000 करोड़ के भारी-भरकम बजट में बनी नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा की भव्य फिल्म ‘रामायण’ (पार्ट 1) में जब पक्षीराज पर्दे पर आए, तब उन्हें देख दर्शक दंग रह गए.

समय बदला, तकनीक बदली और सिनेमाई विजन बदला. 80 के दशक के उस केबल-कॉस्ट्यूम वाले जटायु से लेकर आज के अत्याधुनिक 3D VFX वाले जटायु में ज़मीन-आसमान का अंतर है. आइए, जानते हैं रामानंद सागर के आइकॉनिक शो और रणबीर कपूर स्टारर 2000 करोड़ी फिल्म ‘रामायण’ के जटायु में वो 5 सबसे बड़े और दिलचस्प बदलाव, जिन्होंने इस किरदार की परिभाषा ही बदल दी,

1. परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि

रामानंद सागर का टीवी सीरियल: 80 के दशक के शो में जटायु और भगवान राम का परिचय पंचवटी में वनवास के दौरान होता है. श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता जब जटायु को देखते हैं, तो राम नम्रता से उनका परिचय और कुल पूछते हैं. तब जटायु अपना पूरा वंशवृक्ष बताते हैं कि वे महर्षि कश्यप के पुत्र अरुण (सूर्य के सारथी) के बेटे हैं, गरुड़ उनके चाचा हैं और गरुड़राज संपाती उनके बड़े भाई हैं. जटायु ये भी याद दिलाते हैं कि कैसे समरासुर युद्ध में उन्होंने राजा दशरथ के प्राण बचाए थे और दशरथ ने उन्हें अपना प्रिय मित्र माना था. इसके बाद जटायु पंचवटी में राम-सीता की रक्षा का जिम्मा संभालते हैं.

नितेश तिवारी की 2000 करोड़ी फिल्म: 2026 की फिल्म में पंचवटी में औपचारिक परिचय का कोई दृश्य ही नहीं रखा गया है. यहां जटायु, भगवान राम के जन्म के समय से ही उनसे जुड़े हुए हैं. पक्षीराज को पता है कि राम साक्षात भगवान विष्णु के अवतार हैं और वे बाल राम के दर्शन आकाश मार्ग से ही कर लेते हैं. राम जब बड़े होकर धनुर्विद्या और साधना करते हैं (रणबीर कपूर का किरदार), तो एक बेहद विहंगम दृश्य में राम को पहाड़ों और खाइयों के बीच छलांग लगाते वक्त जटायु का सहारा लेते और उनके साथ उड़ते हुए दिखाया गया है. यानी फिल्म में दोनों का संबंध जन्म से ही पिता तुल्य.

2. विजुअल इफेक्ट्स बनाम प्रैक्टिकल कॉस्ट्यूम

रामानंद सागर का टीवी सीरियल: सीरियल का दौर सीमित बजट और शुरुआती क्रोमा तकनीक का था. वहां महज 16 साल की उम्र में एक्ट्रेस सुनील वर्मा ने जटायु का किरदार निभाया था (सुनील वर्मा ने सीरियल में इंद्रदेव और गरुड़ सहित कुल 6 किरदार निभाए थे). जटायु का गेटअप तैयार करने के लिए भूरे-स्लेटी कपड़े पर फेविकोल की मदद से मुर्गियों के असली पंख चिपकाए गए थे और चेहरे पर फाइबर-एकरालिक का भारी मास्क था. हवा में उड़ने और फाइट दिखाने के लिए सुनील वर्मा को बांधकर उन्हें रस्सियों (वायर-वर्क) के सहारे हुक से लटकाया जाता था और बाद में क्रोमा तकनीक से रस्सियां इरेज़ की जाती थीं.

नितेश तिवारी की 2000 करोड़ी फिल्म: नितेश तिवारी और ऑस्कर विजेता VFX स्टूडियो DNEG ने जटायु को पूरी तरह से 3D फोटो-रियलिस्टिक CGI/VFX के जरिए एनिमेटेड जीव का रूप दिया है. पक्षीराज के एक-एक पंख, उनकी खतरनाक आंखें और विशालकाय पंखों की उड़ान देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. सोने पर सुहागा यह है कि जटायु के किरदार को बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अनुपम खेर ने अपनी कड़क और गंभीर आवाज़ दी है, जिससे उनके हर एक संवाद में पक्षीराज का गर्व और तेज झलकता है.

3. रावण संग महासंग्राम

रामानंद सागर का टीवी सीरियल: सीरियल में रावण और जटायु के बीच पहले लंबा संवाद और नीति-अनीति का ज्ञान होता है. इसके बाद जटायु रावण के रथ और पंजों से हमला करते हैं, और अंत में रावण अपनी दिव्य ‘चंद्रहास खड़ग’ से जटायु के पंख काट देता है, जिससे वे धरती पर आ गिरते हैं.

नितेश तिवारी की 2000 करोड़ी फिल्म: 2026 की फिल्म में यह युद्ध विजुअली बेहद लाजवाब है. लंकापति रावण को पुष्पक विमान पर चुनौती देते हुए जटायु अपने नुकीले पंजों से वार करते हैं और दोनों के युद्ध में एक ऐसा खौफनाक मोड़ आता है जहां जटायु रावण की गर्दन दबाकर उसके एक सिर को धड़ से अलग कर देते हैं! लेकिन अमरता का वरदान प्राप्त रावण का सिर दोबारा जुड़ जाता है. इस अपमान और अपने सिर के कटने से तिलमिलाया अहंकारी रावण बर्बरता की सारी हदें पार कर देता है. वो न केवल जटायु के पंख छांट देता है, बल्कि गुस्से में जटायु के उस नाखून को भी काट डालता है, जिसने उन्होंने रावण के सिर को शादी से अलग किया था. दल

जटायु की खोज: आकाश में मंडराते पंछियों का क्लू

रामानंद सागर का टीवी सीरियल: धारावाहिक में सीता हरण के बाद जब राम और लक्ष्मण पंचवटी लौटते हैं, तो वे बेसुध होकर जंगल में सीता को ढूंढते हैं और ढूंढते-ढूंढते रास्ते में ज़मीन पर तड़पते हुए जटायु तक पहुंच जाते हैं.

नितेश तिवारी की 2000 करोड़ी फिल्म: फिल्म में राम और लक्ष्मण पूरी तरह सुरागहीन होते हैं. उन्हें समझ नहीं आता कि सीता को कौन और किस दिशा में ले गया है. तभी रणबीर कपूर (राम) की नज़र नीले आकाश में एक ही जगह गोल-गोल मंडराते सैकड़ों पंछियों पर पड़ती है. पक्षियों के इस असामान्य व्यवहार को देखकर राम-लक्ष्मण (रवि दुबे) उस तरफ भागते हैं और वहां उन्हें जटायु का लहुलुहान धड़ मिलता है. प्रकृति का यह क्लू देने वाला शॉट बेहद सिनेमाई है.

रणनीतिक मार्गदर्शन और ‘पक्षियों की श्रद्धांजलि’ वाला भावुक अंतिम संस्कार

रामानंद सागर का टीवी सीरियल: सीरियल में जटायु केवल इतना बताते हैं कि लंकापति रावण सीता का अपहरण करके उन्हें दक्षिण दिशा की ओर ले गया है, और राम की बाहों में अपने प्राण त्याग देते हैं. फिर राम उनको मुखाग्नि देते हैं.

नितेश तिवारी की 2000 करोड़ी फिल्म: जहां जटायु मरने से पहले श्री राम के रणनीतिक मार्गदर्शक बनते हैं. वे राम को सचेत करते हैं, “तुम दोनों अकेले रावण को नहीं हरा सकते और न ही लंका तक पहुँच सकते हो. तुम्हें किष्किंधा जाना होगा और वानरों के राजा सुग्रीव से हाथ मिलाना होगा.”

इसके बाद आता है फिल्म का सबसे भावुक और भव्य क्लाइमेक्स सीन-जटायु का अंतिम संस्कार. चूंकि राम जटायु को अपने पिता दशरथ के समान मानते थे, इसलिए आसमान से सैकड़ों पंछी उड़ते हुए आते हैं और अपनी चोंच में दबी पेड़ की छोटी-छोटी टहनियाँ और लकड़ियां जटायु के पार्थिव शरीर पर अर्पित करते हैं. पक्षियों की यह अनोखी श्रद्धांजलि और श्री राम द्वारा दी गई मुखाग्नि के बाद रणबीर कपूर का किरदार रावण के अहंकार को चूर-चूर करने और सीता को वापस लाने की महाप्रतिज्ञा लेते हैं. रामानंद सागर के भावुक अभिनय और संवादों से सजा जटायु का किरदार जहाँ हमारी पुरानी यादों में अमर है, वहीं नितेश तिवारी के VFX और अनुपम खेर की आवाज़ वाला जटायु 21वीं सदी के दर्शकों को थिएटर में भावुक कर देता है.

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