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Ramayana Movie Explain: रणबीर कपूर की ‘रामायण’ के कई सीन चौंकाते हैं, पर्दे पर पहली बार दिखे ये प्रसंग

Ramayana Movie Released: निर्माता नमित मलहोत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की यह रामायण अब तक की परंपरा से हटकर बनी है. किरदार, प्रसंग से लेकर पिक्चराइजेशन की शैली तक में नवीनता देखी जा सकती है. यह पुराने रिवाजों में बनने वाली रामायण नहीं है. आज की पीढ़ी की बदलती अभिरुचि को ध्यान में रखकर बनाई गई है. यहां केवल राम-रावण कथा और सीताहरण की कहानी नहीं है. कई नए प्रसंग और सीन भी दिखाए गए हैं, जिन्हें दर्शकों ने अब तक सिल्वर स्क्रीन पर नहीं देखा होगा. इस लिहाज से भी रणबीर की रामायण में कुछ नयापन है. इन्हें देखना रोमांचक लगता है. वर्ल्डक्लास वीएफएक्स की भव्यता देखते बनती है.

वास्तव में पौराणिक होकर भी रामायण के मंचन या फिल्मांकन में नवीनता महसूस करना धार्मिक मुद्दा हो सकता है लेकिन आम दर्शकों में उसकी लोकप्रियता और कालजयिता उसकी गुणवत्ता पर टिकी होती है. रामानंद सागर ने जो रामायण टीवी सीरियल बनाया- उसमें धार्मिक भावना के साथ कथा विस्तार और किरदार का ठहराव अहम बिंदुएं हैं लेकिन करीब चालीस साल बाद नमित-नितेश की रामायण अब फिल्ममेकिंग के वर्ल्डवाइड टेक्नीक और टेम्परामेंट के साथ आगे बढ़ती है. फिल्म की दुनिया भर में स्वीकृति हो, इसीलिए इसका विजन ओपेन और सिनेमैटिक रखा गया है.

राम से पहले रावण को किया स्टैबलिश

नमित मलहोत्रा-नितेश तिवारी की इस रामायण में पहले की बनी रामायणों के मुकाबले कई नए प्रसंग गुथे हैं. आमतौर पर किसी भी कालखंड में फिल्मी पर्दे पर हमें जो रामायण देखने को मिली है, उसकी शुरुआत अयोध्या में राजा दशरथ के दरबार से होती है. दशरथ का आखेट पर जाना, तीनों रानियों के साथ उनके प्रसंग होते हैं फिर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की लीलाएं, शिक्षा, दीक्षा आदि दिखाई जाती है, स्वंयवर होते हैं, वनवास होता है उसके बाद रावण का प्रवेश होता है. इस फिल्म में राजा दशरथ अरुण गोविल बने हैं.

अब 2026 की इस रामायण में कहानी रावण से शुरू होती है. कहानी में पहले रावण के किरदार को स्टैबलिश किया जाता है. उससे भी पहले देवासुर संग्राम. लंका पर देवों के प्रतिनिधि कुबेर का कब्जा. लेकिन रावण को उसकी मां कैकसी कैसे उसे तैयार करती है, फिर रावण कैसे कुबेर को परास्त करके लंकाधिपति बनता है, इसे भी विस्तार से दिखाया गया है. जाहिर है इस दौरान यश का स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों को अभिभूत कर देता है. फिल्म की कहानी में इससे रोमांच बढ़ जाता है. रामायण की रोचकता बढ़ती है. शुरुआत में रावण का किरदार हावी होता है.

Sai Pallavi Sita

सीता के रोल में साई पल्लवी

वनवास में सीता ने चलाई तलवार

फिल्म में सीता जी का किरदार साई पल्लवी ने निभाया है. रामायण में सीता जी एक ऐसी किरदार हैं, जिन्हें आमतौर पर फिल्मों या टीवी सीरियलों में विवाह पूर्व और विवाह के बाद परस्पर विपरीत दिखाया गया है. वह विवाह से पूर्व प्रकृति प्रेमी हैं, विदुषी हैं, वीरता से युक्त है, वह शास्त्र और शस्त्र दोनों का बखूबी ज्ञान रखती हैं. लेकिन विवाह के बाद बिल्कुल सुकुमारी हो जाती हैं- हमने अब तक की पुरानी फिल्मों में यही देखा है.

जबकि अब 2026 की इस रामायण में सीता सुकुमारी नहीं है. वह वनवास के दौरान भी कई स्थलों पर शस्त्र चलाती हुई देखी जाती हैं. जब जब राक्षसों का सामना होता है, वह राम और लक्ष्मण की तरह खर और दूषण जैसे राक्षसों से जरूरत पड़ने पर तलवार चलाकर युद्ध करती हुई भी दिखती हैं. इस प्रकार वनवास में सीता को युद्ध करते हुए दिखाकर फिल्ममेकर ने महिलाओं के प्रति नया नजरिया पेश किया है. साई पल्लवी ने भी यह किरदार बिना किसी उच्चारण दोष के निभाया है. वह सुकुमारी भी लगी हैं और वीरांगना भी.

जब जटायु ने रावण के सिर काटे

रामायण में सीताहरण के बाद रावण और जटायु युद्ध की अपनी अलग कहानी है. फिल्म में जटायु की आवाज़ अनुपम खेर ने दी है. सीता जी को बचाने के लिए पुष्पक विमान पर सवार रावण से युद्ध करते हुए जटायु ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे और जख्मी हालत में ज़मीन पर गिरकर श्रीराम तथा लक्ष्मण को हरण के बारे में बताया था.

अनेक बार हम इस कहानी को देख चुके हैं लेकिन अब 2026 की इस रामायण में एक नया प्रसंग देखने को मिला है. जटायु लड़ते-लड़ते एक तो रावण की नाक में दम कर देता है, उसे कई बार अपने पंजे में पकड़कर पुष्पक से उड़ा लेता है और अपने कटे पंखे की तेज धार से रावण का गला काट देता है. कुछ क्षण के लिए सिर कटा रावण विमान पर पड़ा रहता है, हालांकि वह अपनी मायावी शक्ति से दोबारा सिर पा लेता है और जटायु को मार कर नीचे गिरा देता है.

रावण-विद्युतजिह्वा का युद्ध भी दिखाया

रामायण में शूर्पणखा को बार-बार दिखाया जाना आवश्यक रहा है. वह लंका कांड की आधार है. इस फिल्म में शूर्पणखा की भूमिका रकुलप्रीत सिंह ने निभाई है. उसे प्रारंभ से ही दिखाया गया है, जब रावण ने कुबेर से लड़कर लंका जीती थी. लेकिन इस फिल्म में शूर्पणखा के साथ-साथ उसके पति विद्युतजिह्वा को भी दिखाया गया है जोकि रावण का बहनोई था. विद्युतजिह्वा का रोल विवेक ओबेराय ने निभाया है. वह बलशाली लगे हैं और प्रभाव पैदा करते हैं.

रामायण में रावण-विद्युतजिह्वा के द्वंद्व की कथा तो है लेकिन किसी फिल्म या सीरियल में उनके युद्ध को दिखाना जरूरी नहीं समझा गया. जबकि यहां दोनों के द्वंद्व के साथ-साथ युद्ध को भी विस्तार से दिखाया गया है. शू्र्पणखा के सामने ही उसके पति को रावण मार डालता है. इस प्रसंग के बहाने यश और विवेक ओबेराय को पर्दे पर युद्ध करते हुए देखना दर्शकों में रोमांच जगाता है. स्क्रीन पर रामायण फिल्म का यह भी एक नया पक्ष है. यह एक्शन से लैस है.

एक्शन और एडवेंचर से भरपूर फिल्म

इस रोमांचक फिल्मांकन के साथ यह बताना भी जरूरी है कि रणबीर कपूर की रामायण पुरानी धारणाओं को तोड़ती है. नए प्रतिमान गढ़ती है. रामायण की धुरी आस्था और भक्ति है. अब तक की फिल्मों और सीरियलों में इसे प्रमुखता से दिखाया गया है लेकिन नमित मलहोत्रा और नितेश तिवारी ने इस रामायण में आस्था और भक्ति की बुनियाद पर एक्शन और एडवेंचर से भव्य महल खड़ा किया है, जिसमें वीएफएक्स का कमाल दिखता है.

यह वीएफएक्स सोने की लंका और पुष्पक विमान की संरचना में सबसे भव्य रूप में सामने आता है. कहना एकदम गलत नहीं होगा कि फिल्ममेकर्स ने अपनी इस फिल्म में रामायण में निहित एक्शन और एडवेंचर को नए तरीके से खोजा और उसे प्राथमिकता के साथ प्रस्तुत किया है. इससे फिल्म एक भव्य प्रस्तुति हो गई है.

इसी के साथ अहम बात ये भी बताने की हो जाती है कि अब तक रामायण में गीत भजन की तरह लिखे गए हैं लेकिन यहां आम फिल्मों के मिजाज के मुताबिक कवि कुमार विश्वास ने शृंगारपरक गाने लिखे हैं. तो हैंस जिम्मर और एआर रहमान का संगीत जितना क्लासिक है, उतना ही वर्ल्डक्लास बैकग्राउंड स्कोर से लैस भी.

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