Ramayana Movie Review: राम की सौम्यता, रावण का रौद्र रूप…रणबीर कपूर की ‘रामायण’ सिर्फ फिल्म नहीं, आस्था का जश्न है!

Ramayana Movie Review:हमारे देश में जब भी ‘रामायण’ का नाम लिया जाता है, तो दिमाग में कोई फिक्शन या काल्पनिक कहानी नहीं घूमती, बल्कि मां के मुंह से सुनी कहानी, दादा-दादी के किस्से और रामलीला के मेले जहन में ताजा हो जाते हैं, जिसके हम बचपन से गवाह बने हैं. कहा जाता है कि रामायण सिर्फ एक ग्रंथ नहीं है, ये हमारे आचरण, हमारी सांसों और हमारी संस्कृति की वो नींव है, जिस पर पूरा भारतवर्ष खड़ा है. पिछली बार जब इस महाकाव्य को सेल्युलाइड पर उतारने की कोशिश हुई थी (जैसे ‘आदिपुरुष’), तो जल्दबाजी और भारी-भरकम दबाव के चक्कर में मामला ऐसा उलझा कि दर्शकों के हाथ सिर्फ निराशा लगी. लोग डर गए थे कि क्या कभी कोई इस पवित्र कथा के साथ न्याय कर पाएगा? लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल जुदा है.
निर्देशक नितीश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा ने इस बार किसी डर या दबाव में काम करने के बजाय पूरी खुली सोच और क्रिएटिव लिबर्टी और आस्था के साथ मैदान में कदम रखा है. फिल्म के ट्रेलर पर दर्शकों ने जो फीडबैक दिया था, मेकर्स ने उसे दिल पर लिया और एक ऐसा मास्टरपीस तैयार किया जिसे देखते ही बनता है. 5 तारीख को बड़े पर्दे पर रिलीज होने वाली इस महागाथा को हमें दूसरों से पहले देखने का खास मौका मिला. ऐसे में, टिकट बुक करने से पहले अगर आप ये जानना चाहते हैं कि ‘रामायण: पार्ट 1‘ उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है, तो ये रिव्यू पूरा जरूर पढ़ें.
रामायण की कहानी
आम तौर पर रामायण की कथा श्रीराम के जन्म या राजा दशरथ के दरबार से शुरू होती है, लेकिन निर्देशक ने इस बार कहानी की शुरुआत सीधे दशानन रावण के जन्म से पहले के देव-दानव संग्राम से की है. फिर पता चलता है कि कैसे एक कलाप्रेमी दशानन ‘रावण’ बना और उसके बढ़ते अहंकार को कुचलने के लिए प्रभु राम का अवतार क्यों जरूरी था. फिल्म का पहला भाग ब्रह्मा-रावण संवाद से होते हुए राम जन्म, भरत मिलाप, शूर्पणखा प्रसंग और रावण-जटायु के महायुद्ध जैसे तमाम पड़ावों से गुजरता हुआ आगे बढ़ता है. आख़िरकार कहानी वहां जाकर थम जाती है जहां से आगे की दास्तान और भी ज्यादा भव्य होने वाली है. पर्दे पर ये सब कैसे जीवंत हुआ है और आगे क्या-क्या होता है, इसका पूरा लुत्फ उठाने के लिए आपको ये फिल्म थिएटर में जाकर ही देखनी चाहिए.
रामायण पोस्टर
कैसी है रणबीर कपूर की रामायण?
जैसा कि हमने शुरुआत में कहा है कि रामायण की कहानी देश के बच्चे-बच्चे की जुबान पर रटी है, और रामानंद सागर का सीरियल तो आज भी उसी प्यार और आस्था से पूरे देश में देखा जाता है. ऐसे में इस जानी-पहचानी गाथा को परदे पर नया रूप देना किसी चुनौती से कम नहीं था. लेकिन निर्देशक ने यहीं बाजी मार ली है, फिल्म सिर्फ पुरानी कथा को दोहराती नहीं, बल्कि राम और रावण के जीवन के उन अनछुए पहलुओं को सामने लाती है जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं. रावण के अहंकार के पीछे की वजह, उसके राजपाट की लालसा, असुरों की दुनिया, राम-परशुराम का आमना-सामना और कैकेयी के साथ राम का इमोशनल रिश्ता जैसे ये तमाम अध्याय फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाते हैं. कसी हुई पटकथा और शानदार निर्देशन का ही कमाल है कि कहानी पहले से पता होने के बावजूद दर्शक अपनी कुर्सी से चिपके रहते हैं.
निर्देशन और तकनीक का जादू
नितेश तिवारी ने ये साबित कर दिया है कि अगर निर्देशन की नब्ज डायरेक्टर के हाथ में हो, तो तीन घंटे का सफर कब बीत जाता है पता ही नहीं चलता. उन्होंने कहानी को कहीं भी फैलने नहीं दिया. स्क्रीनप्ले इतना कसा हुआ है कि आप अपनी सीट से उठने की हिम्मत ही नहीं कर पाएंगे. इस फिल्म की सबसे बड़ी जीत ये है कि इसमें सिर्फ महंगे वीएफएक्स का दिखावा नहीं है, बल्कि इसके भीतर एक आत्मा है, जो हमारे दिल को अंदर से हिला देती है. अब बात करते हैं तकनीकी पक्ष की, तो भाई मान गए एकेडमी अवॉर्ड जीतने वाले वीएफएक्स स्टूडियो DNEG को! भारतीय सिनेमा के इतिहास में आपने स्क्रीन पर ऐसा करिश्मा कभी नहीं देखा होगा.
हर एक विजुअल ऐसा है जो हॉलीवुड की बड़ी से बड़ी फैंटेसी फिल्मों को टक्कर दे दे. सोने पर सुहागा बनता है एआर रहमान का संगीत और उनके साथ लेजेंडरी हंस जिमर का बैकग्राउंड स्कोर. भले ही म्यूजिक शुरुआत में इतना प्रभावित नहीं कर पाया था, लेकिन फिल्म देखते हुए ये सीधे कान के रास्ते दिल में उतरता है और थिएटर में बैठे हर शख्स के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. शायद यही वजह है कि जानी-पहचानी कहानी होने के बावजूद ये फिल्म दर्शकों को बांधे रखती है और अपनी भव्यता और प्रस्तुति के दम पर बिना किसी शक के सीधे पूरे मार्क्स यानी पांच में से पांच अंक ले जाती है.
कलाकारों की एक्टिंग
‘एनिमल’ जैसी फिल्म में खून-खराबा और खूंखार रूप देखने के बाद किसी के भी मन में ये सवाल आना लाजमी था कि क्या रणबीर कपूर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के किरदार को निभा पाएंगे? लेकिन रणबीर ने आलोचकों के मुंह पर ऐसा करारा तमाचा जड़ा है कि देखने वाले दंग रह जाएंगे. उस हिंसक छवि को पूरी तरह भूल जाइए. रणबीर ने अपनी आंखों के ठहराव, उस शांत मुस्कान और बिना किसी ओवर-एक्टिंग के जिस देवत्व और गरिमा को पर्दे पर उतारा है, उसे देखकर सचमुच ऐसा लगता है कि हमारे सामने खुद प्रभु श्री राम खड़े हैं. उन्होंने अपना 1000% इस रोल में झोंक दिया है. रावण के रोल में यश का रौद्र रूप और उनका भारी-भरकम कद पर्दे पर आग लगा देता है. निगेटिव किरदार में जितनी इंटेंसिटी और खूंखारपन चाहिए, यश वो सब अपने किरदार में झोंक दिया.
रामायण पोस्टर (रावण)
साई पल्लवी जब-जब पर्दे पर आती हैं, चेहरे पर एक अलग ही सुकून आ जाता है. उनकी सादगी, उनकी आंखों की कोमलता और उस किरदार की पवित्रता को उन्होंने जिस सहजता से निभाया है, वो दिल जीत लेता है. लक्ष्मण के रूप में रवि दुबे ने जितनी एनर्जी, ऊर्जा और गहराई दिखाई है, उसने पूरी महफिल लूट ली. कई बड़े कलाकारों के होने के बावजूद रवि ने इस फिल्म में अपना जादू चलाया है
बाकी कलाकारों की बार करें तो अरुण गोविल को बड़े परदे पर देखना पुरानी यादों को ताजा कर जाता है. इसके अलावा रकुल प्रीत, शोभना, लारा दत्ता, विवेक ओबेरॉय और अजिंक्य देव जैसे तमाम दिग्गज कलाकारों ने अपनी मौजूदगी से इस कहानी को और मजबूत बनाया है और हां, सनी देओल वाला सरप्राइज भी दिलचस्प है.
रामायण देखें या नहीं?
फिल्म में सब कुछ एकदम परफेक्ट हो, ऐसा तो मुमकिन नहीं है. ‘रामायण’ जैसे विशालकाय प्रोजेक्ट में जहां वीएफएक्स का समंदर है, वहां कुछेक जगह मेगा-साइज के मॉन्स्टर्स वाले शॉट्स थोड़े कच्चे और एनिमेटेड जरूर लगते हैं. इसके अलावा, पहले और दूसरे हाफ के बीच में ड्रामा थोड़ा सुस्त पड़ता है और फिल्म की रफ्तार धीमी होती है. सबसे बड़ा फेर ये है कि ‘रामायण पार्ट 1’ का झुकाव रावण की तरफ ज्यादा है, शुरुआती दृश्यों में यश का एक्शन और तेवर एकदम ‘केजीएफ’ वाले रॉकी भाई की याद दिलाता है, जो कुछ दर्शकों को थोड़ा अलग लग सकता है, लेकिन, सेकंड हाफ में यश की जगह सिर्फ रावण ही नजर आते हैं, उनका तांडव शानदार है, हालांकि उम्मीद है कि अगले पार्ट में राम ज्यादा देखने को मिलेंगे.
पिछली बार जब पर्दे पर इस महागाथा को उतारने की कोशिश हुई थी, तो हाथ लगी निराशा ने हर भारतीय के दिल को दुखाया था. उस बुरे और फीके अनुभव के सारे दाग धोने के लिए ‘रामायण’ किसी वरदान से कम नहीं है. ये अब तक की सबसे बेहतरीन, डिटेल और खुलकर सामने लाई गई कहानी है. ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हमारी उस सांस्कृतिक विरासत का जश्न है जो हर भारतीय की रगों में दौड़ती है. ‘पार्ट वन’ बॉक्स ऑफिस पर सुनामी लाने के लिए तैयार है, और जब ‘पार्ट टू’ आएगा, तो इतिहास फिर से लिखा जाएगा. इस दिवाली अपने बच्चों और परिवार के साथ इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए. जय श्री राम!




