देवा मेला के सांस्कृतिक मंच पर एडीजे श्रीकृष्ण चन्द्र ने गजलों से बांधा समां, झूम उठे दर्शक
सुप्रसिद्ध गजल गायक जगजीत सिंह की सदाबहार गजलों की दिलकश प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

न्यायिक दायित्वों के साथ संगीत साधना का अनूठा संगम बना आकर्षण का केंद्र
बाराबंकी। ऐतिहासिक देवा मेला एवं प्रदर्शनी-2026 की सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार को सांस्कृतिक मंच पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) श्रीकृष्ण चन्द्र ने अपनी गजल गायकी से समां बांध दिया। सुप्रसिद्ध गजल गायक जगजीत सिंह की सदाबहार गजलों को अपनी आवाज में प्रस्तुत कर उन्होंने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनकी सुमधुर आवाज, भावपूर्ण अंदाज और सुरों की मिठास पर दर्शक झूम उठे। प्रस्तुतियों के दौरान सांस्कृतिक पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
*सदाबहार गजलों से सजी संगीतमय शाम*
कार्यक्रम की शुरुआत एडीजे श्रीकृष्ण चन्द्र ने जगजीत सिंह की मशहूर गजल ‘ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो’ से की। इसके बाद उन्होंने ‘प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है’ और ‘झुकी-झुकी सी नज़र, बेकरार है कि नहीं’ जैसी लोकप्रिय गजलों की प्रस्तुति देकर माहौल को संगीतमय बना दिया। उन्होंने ‘बेखुदी में सनम, उठ गए जो कदम’ के साथ ही जगजीत सिंह की चर्चित गजल ‘वक्त रुकता नहीं किसी के लिये न मोहब्बत, न दोस्ती के लिए’ की भी बेहद भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इस गजल में रिश्तों की संवेदनशीलता, जीवन की तल्ख हकीकत और इंसानी जज्बातों को जिस खूबसूरती से अभिव्यक्त किया गया है, उसे श्रीकृष्ण चन्द्र ने अपनी आवाज और गायकी के अंदाज से जीवंत कर दिया। गजल के हर शेर में छिपे भावों और दर्द को उन्होंने पूरी संजीदगी के साथ प्रस्तुत किया। उनकी इस प्रस्तुति ने श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया और पंडाल देर तक तालियों से गूंजता रहा।
एक के बाद एक सदाबहार गजलों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को संगीत की दुनिया में पहुंचा दिया। दर्शकों ने तालियों के साथ उनकी गायकी का भरपूर आनंद लिया।
न्यायिक दायित्वों के साथ संगीत साधना का अनूठा संगम
न्यायिक दायित्वों के निर्वहन के साथ साहित्य और संगीत के प्रति श्रीकृष्ण चन्द्र की अभिरुचि का यह अनूठा संगम कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा। उनकी प्रस्तुति ने यह दर्शाया कि व्यस्त पेशेवर जीवन के बीच भी कला और संगीत के लिए विशेष स्थान बनाया जा सकता है। श्रोताओं ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया और संगीतमय शाम को यादगार बना दिया।
ऐतिहासिक देवा मेला का सांस्कृतिक मंच एक बार फिर कला, साहित्य और संगीत के खूबसूरत संगम का साक्षी बना।




