JSSC CGL परीक्षा रद्द होगी या नहीं? कल झारखंड हाईकोर्ट में बड़ा फैसला

झारखंड की चर्चित जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा से जुड़े मामले में 6 नवंबर यानी कल का दिन बेहद अहम होने वाला है. कल इस मामले पर झारखंड हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाने वाला है. झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 8 अक्टूबर को इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब JSSC-CGL से चयनित होकर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों सफल अभ्यार्थियों की निगाहें कल के झारखंड हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने 17 अगस्त को जेएसएससी सीजीएल परीक्षा सहित जेपीएससी के द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितता और गड़बड़ियों को लेकर 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. 18 अगस्त को झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग ने अनियमितताओं और रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में 25 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद आधिकारिक रूप से अधिसूचना जारी कर कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द करने की साथ ही 6 अन्य परीक्षाओं को स्थगित करने और पूर्व की 17 परीक्षाओं की सीआईडी (CID) जांच के आदेश देने से संबंधित अधिसूचना जारी किया था.
सरकार के फैसले के खिलाफ HC पहुंचे थे अभ्यर्थी
झारखंड सरकार के प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के खिलाफ JSSC-CGL और JPSC से चयनित सफल अभ्यर्थी राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट पहुंचे थे. 8 अक्टूबर 2026 को झारखंड हाईकोर्ट में इस परीक्षा के विज्ञापन को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जेएसएससी सीजीएल मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और कहा था कि अब 6 नवंबर को इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाएगी.
8 अक्टूबर को सुनवाई में क्या हुआ था?
8 अक्टूबर को हुई सुनवाई में राज्य की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा और एडवोकेट जनरल रोहिताश्य रॉय ने परीक्षा कैंसिल करने का बचाव करते हुए परीक्षा से जुड़ी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का हवाला दिया था. सरकार ने कहा था कि इस मामले में 28 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच जारी है. राज्य ने तर्क दिया था कि हालात को देखते हुए दोषी और बेगुनाह उम्मीदवारों में फर्क करना मुमकिन नहीं था.
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